Form 121 कैसे भरें?
TDS से बचने का नया तरीका
बैंक पैसे काट लेता है? अब एक छोटा सा फॉर्म भरकर अपना TDS रोकिए एकदम आसान भाषा में, पूरी जानकारी। application format देखें
Form 121 एक declaration form है जिसे भरकर आप बैंक को बता सकते हैं कि आपकी आय taxable नहीं है, इसलिए TDS नहीं काटा जाए।
सरल भाषा में बात करें तो मान लो आपका बैंक FD पर हर साल ₹50,000 या ₹60,000 ब्याज देता है। और आपकी कुल कमाई इतनी कम है कि आप पर कोई टैक्स बनता ही नहीं। फिर भी बैंक TDS काट लेता है। बड़ी झुंझलाहट होती है ना?
इसी के लिए एक फॉर्म होता था जिसमें आप बैंक को बोल सकते थे, “भाई, मेरी कमाई इतनी है, मुझ पर टैक्स शून्य है, TDS मत काटो।” पहले यह काम Form 15G और Form 15H करते थे। अब 1 अप्रैल 2026 से ये दोनों बंद हो गए हैं और इनकी जगह एक नया फॉर्म आया है Form 121।
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Form 121 एक स्व-जानकारी पत्र है जिसमें आप सरकार को बताते हो कि “इस साल मेरी कुल कमाई पर टैक्स शून्य है इसलिए मेरा TDS मत काटो।” यह आयकर अधिनियम 2025 की धारा 393(6) के तहत आया है।
यह एक छोटा सा काम है जो आप साल में एक बार अपने बैंक में जाकर या ऑनलाइन कर सकते हो। और यह काम आपके हजारों रुपये बचा सकता है जो TDS के रूप में कट जाते थे।
पहले लोग उलझ जाते थे कोई कहता 15G भरो, कोई कहता 15H। कौन सा भरें है, उसके लिए उम्र देखनी पड़ती थी। अब सरकार ने सब आसान कर दिया है:
| बात | पहले (1961 का अधिनियम) | अब (2025 का अधिनियम) |
|---|---|---|
| 60 साल से कम के लोग | Form 15G | Form 121 |
| 60 साल से अधिक (वरिष्ठ नागरिक) | Form 15H | Form 121 |
| HUF (हिंदू अविभाजित परिवार) | Form 15G | Form 121 |
| PAN जरूरी है? | हाँ (वरना 20% TDS) | हाँ, जरूरी है |
| UIN (अनूठा पहचान नंबर) | हर बैंक अलग नंबर देता था | एक UIN पूरे साल के लिए |
| कितने फॉर्म हैं? | 2 अलग फॉर्म (15G + 15H) | सिर्फ 1 फॉर्म सबके लिए |
मतलब अगर आप 68 साल के सेवानिवृत्त हो या 28 साल के नौजवान दोनों Form 121 ही भरेंगे। कोई उलझन नहीं।
यह बहुत जरूरी है। सीधे देखो:
✅ ये लोग भर सकते हैं
- भारत में रहने वाले व्यक्ति (किसी भी उम्र के)
- HUF (हिंदू अविभाजित परिवार)
- वो लोग जिनकी कुल कमाई पर टैक्स शून्य हो
- जो भारत के रहने वाले हों (Resident)
❌ ये लोग नहीं भर सकते
- NRI (अरहने वाले भारतीय)
- कंपनी या फर्म
- जो लोग टैक्स लगने वाली कमाई में हैं
- साझेदारी फर्म
Form 121 तभी काम करेगा जब आपका लगभग कुल टैक्स = शून्य हो। अगर आपकी कमाई टैक्स लगने वाली है और आपने गलत फॉर्म भर दिया, तो यह धोखाधड़ी माना जा सकता है और जुर्माना भी लग सकता है।
उदाहरण से समझो क्या आप योग्य हो?
उदाहरण 1: रमेश जी 45 साल के हैं। फ्रीलांस काम से ₹2.5 लाख मिलते हैं और FD ब्याज ₹1 लाख है। कुल = ₹3.5 लाख। यह मूल छूट सीमा से नीचे है Form 121 भर सकते हैं।
उदाहरण 2: सुषमा जी 68 साल की हैं। पेंशन + FD ब्याज मिलाकर ₹8 लाख कमाई है। नई कर व्यवस्था में ₹12 लाख तक छूट है, तो टैक्स = शून्य। Form 121 भर सकती हैं।
उदाहरण 3: विजय NRI हैं और दुबई में रहते हैं Form 121 नहीं भर सकते।
कब जमा करें?
वित्तीय वर्ष की शुरुआत में यानी अप्रैल में ही। और हमेशा ब्याज देना होने से पहले देना करें। अगर FD का ब्याज जून में मिलता है, तो अप्रैल-मई में ही फॉर्म दे दो।
हर साल नया Form 121 भरें पड़ेगा। पिछले साल का फॉर्म इस साल काम नहीं करेगा। अप्रैल आते ही फॉर्म देना कर दो एक बार करें, साल भर चिंता नहीं।
कहाँ जमा करें?
जहाँ से भी कमाई आ रही है वहाँ। इसे “payer” कहते हैं:
- 🏦 बैंक FD ब्याज के लिए
- 📮 डाकघर डाकघर देना के लिए
- 🏢 म्यूचुअल फंड कंपनी लाभांश / यूनिट के लिए
- 👤 किरायेदार किराए के लिए
अगर आपके 3 अलग बैंकों में FD हैं तो तीनों बैंकों में अलग-अलग Form 121 देना करना होगा। एक बैंक में दिया तो बाकी दो में TDS कटेगा।
ऑनलाइन या ऑफलाइन?
कई बैंक अब ऑनलाइन भी ले रही हैं नेट बैंकिंग या बैंक ऐप से। लेकिन अभी भी ज्यादातर लोग बैंक जाकर शारीरिक रूप से देना करते हैं। अपने बैंक से पूछ लो कि उनका तरीका क्या है।
फॉर्म डाउनलोड करने के लिए Income Tax Department की आधिकारिक वेबसाइट (incometax.gov.in) पर जाओ।
Form 121 के दो हिस्से हैं: भाग A आप भरते हो। भाग B बैंक भरता है।
PAN कार्ड • आधार कार्ड • बैंक का TAN नंबर (बैंक बता देगा) • पिछले 2 साल के ITR की पावती संख्या • इस साल की लगभग कमाई का अंदाज
भाग A आप भरो (Field-by-Field)
अपना पूरा नाम लिखें बिल्कुल वैसे जैसा PAN कार्ड पर है। कोई संक्षिप्त रूप या शुरुआती अक्षर मत लिखें।
पूरा पता लिखें। घर/फ्लैट नंबर, गली, इलाका, शहर, जिला, राज्य, PIN कोड सब कुछ। अधूरा पता फॉर्म रद्द होने का सबसे बड़ा कारण है।
अपना 10-अंक का PAN लिखें। एक भी अक्षर गलत हुआ तो फॉर्म रद्द। दोबारा जाँचो। यह जरूरी है बिना PAN के फॉर्म नहीं चलेगा।
आप क्या हो, वो चुनें: “Resident Individual” या “HUF”। ज्यादातर लोग “Resident Individual” चुनते हैं।
“Resident” चुनें। और Field 5(a) में क्या आपकी उम्र 60 साल या उससे अधिक है? हाँ या नहीं चुनें। अगर 60+ हो तो कुछ शर्तें आप पर लागू नहीं होतीं ज्यादा फायदा मिलता है।
सक्रिय ईमेल और 10-अंक का मोबाइल नंबर दो। आयकर विभाग इसी पर संपर्क करता है। देश कोड भी लिखें (+91)।
जिस साल के लिए फॉर्म भर रहे हो वो लिखें।
कमाई की जानकारी यहाँ ध्यान से भरो
चुनें कि किस चीज पर TDS रोकना चाहते हो। सबसे आम है:
- (a) EPF से पैसे निकालना
- (b) बीमा आयोग
- (c) किराया
- (d) म्यूचुअल फंड की इकाइयाँ
- (e) FD ब्याज, बैंक/डाकघर ब्याज ← सबसे आम
- (f) जीवन बीमा भुगतान
- (g) कंपनी से लाभांश
सिर्फ इस बैंक से जो ब्याज मिलेगा, उसका अनुमान लिखें। यहाँ अपनी कुल कमाई नहीं लिखनी सिर्फ इस एक बैंक का ब्याज।
अगर आपने इस साल पहले से किसी दूसरे बैंक को Form 121 दिया है तो उसकी जानकारी यहाँ भरो। कितने फॉर्म दिए और कितनी कमाई घोषित की। यह छुपाओ मत यह झूठी जानकारी होगी।
Field 10 + Field 11(b) = Field 12। मतलब इस साल आपने जितनी भी कमाई घोषित की है, सबका कुल जोड़।
यह सबसे महत्वपूर्ण field है। आपकी तनख्वाह, FD ब्याज, किराया, लाभांश सब मिलाकर जितनी भी कमाई की उम्मीद है वो लिखें। कटौतियाँ (80C वगेरह) घटाकर जो बचेगा वो। इस संख्या पर टैक्स = शून्य होना चाहिए।
अगर आपने ITR भरा है तो उसकी पावती संख्या और कमाई की राशि लिखें (कर वर्ष 2024-25 और 2023-24 के लिए)। नहीं भरा तो खाली छोड़ दो लेकिन इससे आपकी जानकारी की विश्वसनीयता कम होती है।
जानकारी और हस्ताक्षर
सबसे नीचे 5 बातें लिखी होती हैं ध्यान से पढ़ें। इनमें आप पुष्टि करते हो कि: सारी जानकारी सच है, यह कमाई किसी और की नहीं है, इस साल आपका टैक्स शून्य होगा, और गलत जानकारी देने पर धारा 482 के तहत मामला दर्ज हो सकता है।
हस्ताक्षर करें। तारीख और जगह (Place) लिखें। हो गया भाग A!
भाग B आप नहीं भरते। यह बैंक का काम है। वो अपना TAN, नाम और UIN (26-अंक का अनूठा पहचान नंबर) डालता है और आयकर विभाग को रिपोर्ट करता है। बस आप्हें भाग A देना है।
पहले के सिस्टम में हर बैंक अलग UIN देता था 10 बैंकों में FD है तो 10 अलग UIN। ट्रैकिंग मुश्किल था, धोखाधड़ी भी होती थी।
अब नया सिस्टम है: एक PAN के लिए एक साल में एक ही UIN होगा। आपके सारे फॉर्म एक UIN से जुड़े होंगे। बैंक इस UIN को अपनी तिमाही TDS रिटर्न (Form 140) में रिपोर्ट करता है। मतलब आयकर विभाग हर जानकारी ट्रैक करेगा।
अगर आप 5 बैंकों में Form 121 देते हो सब एक UIN से जुड़े होंगे। आयकर विभाग देख सकता है कि कुल कितना घोषित किया। इसीलिए Field 11 (पहले की जानकारीएँ) सच-सच भरें जरूरी है।
🎯 याद रखो ये 5 बातें
💬 कोई शंका है?
नीचे टिप्पणी करें या अपने CA से पूछो। हर किसी की स्थिति अलग होती है खासकर अगर आपके पास कई कमाई के स्रोत हैं या आप पहली बार ITR फ़ाइल करने वाले हो।